यह क्या है
काली मिर्च Piperaceae कुल की लकड़ी जैसे तने वाली, फूलदार बेल Piper nigrum के कच्चे दानों को तोड़कर और सुखाकर बनाई जाती है।
यह साबुत सूखे दानों के रूप में, पिसी हुई या ताज़ा दरदरी कुटी हुई मिलती है। इसके हरे दाने नमक के घोल या सिरके में डालकर भी बेचे जाते हैं, और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में इनका अचार पारंपरिक रूप से डाला जाता है।
स्वाद और खुशबू
काली मिर्च का अलग, चुभने वाला तीखापन इसमें मौजूद अल्कलॉइड पिपेरिन से आता है, और इसकी गरमाहट देर तक बनी रहती है। साबुत दानों के तेलों में चीड़, नींबू और लकड़ी जैसी खुशबू होती है। हल्का सूखा भूनने या गरम घी में तड़का लगाने से इसकी तेज़ चुभन नरम पड़ती है और लकड़ी व फूलों जैसी हल्की खुशबू निकलती है।
खाने में इस्तेमाल
कब डालें
कुटी हुई काली मिर्च और जीरा, दक्षिण भारतीय मिलगु रसम का बुनियादी स्वाद बनाते हैं; इसकी तीखी चुभन और देर तक रहने वाली गरमाहट से आप इसे तुरंत पहचान लेंगे। वेन पोंगल में साबुत दाने चबाने पर बीच-बीच में गरमाहट का स्वाद देते हैं, और साबुत गरम मसाले के मिश्रण और मसाला चाय में भी काली मिर्च तीखापन देने वाला अहम मसाला है।
तड़के के लिए गरम घी या तेल में साबुत दाने डालें ताकि घी-तेल में खुशबू उतर आए। पकाने के बिल्कुल अंत में ताज़ा दरदरी कुटी काली मिर्च छिड़कें ताकि उड़ जाने वाली खुशबू बची रहे। दक्षिण भारतीय ढंग से तवे पर तले जाने वाले मांस और मछली के मसाले (मैरिनेड) में दरदरी पिसी काली मिर्च मिलाएँ।
इसकी जगह क्या डालें
- White pepperहल्के तीखेपन के लिए बिना काले दाग, बराबर मात्रा में इस्तेमाल करें।
कहाँ से आया और कहाँ उगता है
काली मिर्च का मूल स्थान दक्षिण भारत के मालाबार तट और पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार वर्षावन हैं। भारत में कर्नाटक सबसे बड़ा उत्पादक है, जहाँ कोडागु और चिकमगलूर में बड़े पैमाने पर खेती होती है; केरल के वयनाड और इडुक्की पारंपरिक रूप से बड़े उत्पादक क्षेत्र हैं, और तमिलनाडु के घाटों में भी इसकी व्यावसायिक खेती होती है। मालाबार काली मिर्च भारत की भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के लिए पंजीकृत है, यानी इसे जीआई टैग मिला हुआ है।
कहाँ उगता है
मशहूर किस्में
- Malabar PepperGI टैग
Kerala
खरीदना और रखना
अच्छी क्वालिटी कैसे पहचानें
अच्छी काली मिर्च के दाने भारी, आकार में एक-से और गहरी झुर्रियों वाले होते हैं, और दबाने पर बिखरने के बजाय कड़क से टूटते हैं।
मिलावट की आसान जाँच
FSSAI की मिलावट जाँच पुस्तिका (डार्ट) के अनुसार, पानी भरे गिलास में दाने डालने पर असली काली मिर्च नीचे डूब जाती है, जबकि मिलावट के लिए मिलाए गए पपीते के बीज ऊपर तैरते रहते हैं।
कैसे रखें
साबुत काली मिर्च को एयरटाइट, नमी-रोधी डिब्बे में, सीधी धूप और चूल्हे की गरमी से दूर रखें।
कितने दिन चलता है: साबुत और सीलबंद डिब्बे में रखने पर 3 साल तक।
पोषण
प्रति 100 ग्राम काली मिर्च में मैंगनीज़, विटामिन K और आयरन अच्छी मात्रा में होते हैं, और इसमें जैव-सक्रिय यौगिक पिपेरिन भी होता है; पर खाने में डाली जाने वाली थोड़ी-सी मात्रा से रोज़ की ज़रूरत में ज़्यादा योगदान नहीं होता।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अच्छी काली मिर्च खरीदते समय कैसे पहचानें?
अच्छे दाने भारी, आकार में एक-से और गहरी झुर्रियों वाले होते हैं, और दबाने पर बिखरने के बजाय कड़क से टूटते हैं।
क्या मिलावट जाँचने का कोई आसान तरीका है?
हाँ। FSSAI की मिलावट जाँच पुस्तिका (डार्ट) के अनुसार, असली दाने पानी भरे गिलास में नीचे डूब जाते हैं, जबकि मिलावट में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाले पपीते के बीज ऊपर तैरते रहते हैं।
काली मिर्च खाना बनाते समय कब डालनी चाहिए?
तड़के में गरम घी या तेल में साबुत दाने डालें ताकि उसमें खुशबू उतर आए, पकाने के अंत में ताज़ा कुटी काली मिर्च छिड़कें ताकि खुशबू बनी रहे, और तवे पर तलने वाली चीज़ों के मसाले (मैरिनेड) में दरदरी पिसी काली मिर्च मिलाएँ।
क्या सफेद मिर्च, काली मिर्च की जगह चल सकती है?
जब हल्का तीखापन चाहिए और काले कण न दिखें तो सफेद मिर्च ले सकते हैं। बराबर मात्रा इस्तेमाल करें, तीखापन नरम रहेगा।







