यह क्या है
कलौंजी Nigella sativa के छोटे, काले, बिना चमक वाले, कोणदार बीज हैं। यह पौधा बटरकप परिवार की एक साल में उगने वाली जड़ी-बूटी है। रसोई में इसके सूखे, पके बीज इस्तेमाल होते हैं, ज़्यादातर साबुत।
इसे अक्सर गलती से काले प्याज़ के बीज या काला जीरा कह दिया जाता है, पर वनस्पति विज्ञान के हिसाब से यह उनसे अलग है। इन बीजों से कोल्ड-प्रेस्ड (ठंडी पेराई से निकला) तेल पारंपरिक स्वास्थ्य पद्धतियों और त्वचा पर लगाने वाली चीज़ों में इस्तेमाल होता है।
स्वाद और खुशबू
कच्ची कलौंजी कसैली और साफ़ तौर पर कड़वी होती है। कुछ दाने मसलें तो ओरिगैनो और दरदरी काली मिर्च जैसा तेज़, तीखा स्वाद आता है। हल्का भूनने या गरम तेल में तलने पर कड़वाहट कम हो जाती है और प्याज़, ओरिगैनो और काली मिर्च की झलक लिए गरम, सोंधी खुशबू आती है।
खाने में इस्तेमाल
कब डालें
रोज़ के खाने में तड़के के समय गरम तेल या घी में साबुत कलौंजी डालें, ताकि इसके सुगंधित तेल घी या तेल में समा जाएँ। नाश्ते की चीज़ों और रोटी-पराठों के लिए बीज सीधे आटे या घोल में भी मिला सकते हैं।
यह पंच फोरन के पाँच साबुत मसालों में से एक है। बीज नान, कुलचे और पराठे पर दबाकर लगाएँ, समोसा, मठरी या निमकी के आटे में गूँधें, और आम, मिर्च या नींबू के अचार के उत्तर भारतीय मसाला मिश्रण में डालें।
कहाँ से आया और कहाँ उगता है
Nigella sativa मूल रूप से दक्षिण-पश्चिम एशिया और पूर्वी भूमध्यसागर क्षेत्र का पौधा है, और प्राचीन काल से खाने और दवा दोनों के लिए उगाया जाता रहा है। भारत में इसकी व्यावसायिक खेती राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, पंजाब, असम और पश्चिम बंगाल में होती है।
कहाँ उगता है
खरीदना और रखना
कैसे रखें
साबुत कलौंजी को एयरटाइट काँच या स्टील के फूड-ग्रेड डिब्बे में भरकर ठंडी, सूखी और अँधेरी जगह पर, नमी से दूर रखें।
पोषण
कलौंजी में थाइमोक्विनोन अच्छी मात्रा में होता है, जिसे बीज की एंटीऑक्सीडेंट क्षमता से जुड़ा मुख्य सक्रिय यौगिक माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या कलौंजी और काला जीरा या प्याज़ के बीज एक ही हैं?
नहीं। ये बटरकप परिवार के पौधे Nigella sativa के बीज हैं, और वनस्पति विज्ञान के हिसाब से असली जीरे और प्याज़ से अलग हैं।
कलौंजी तड़के में कब डालें?
तड़के के समय साबुत बीज गरम तेल या घी में डालें, ताकि इनके सुगंधित तेल घी या तेल में समा जाएँ।
कच्ची और भुनी कलौंजी का स्वाद कैसा होता है?
कच्चे दाने कसैले और कड़वे होते हैं; कुचलने पर तेज़, तीखी खुशबू आती है। हल्का भूनने या तलने से कड़वाहट कम होकर गरम, सोंधी, ओरिगैनो और काली मिर्च जैसी खुशबू आती है।
भारतीय खाने में कलौंजी कैसे इस्तेमाल करें?
इसे पंच फोरन में डालें, नान, कुलचे और पराठे पर दबाकर लगाएँ, समोसा, मठरी या निमकी के आटे में गूँधें, और अचार के उत्तर भारतीय मसाला मिश्रण में मिलाएँ।
कलौंजी के कुछ क्षेत्रीय नाम क्या हैं?
बंगाली: कालो जीरे; तमिल: करुंजीरगम; तेलुगु: नल्ला जीलकर्रा; मलयालम: करिंजीरकम; कन्नड़: कारी जीरिगे।







