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Pakwanpedia

सोना मसूरी चावल

Sona masoori rice

अनाज और चावल

खुशबूदार और हल्का, मीडियम-ग्रेन चावल जो साफ़-सुथरा और हल्की मिठास के साथ पकता है। रोज़ का साउथ इंडियन टेबल राइस, सांभर, रसम या दही राइस के साथ एकदम ठीक बैठता है।

wooden plate with scoop, rice heap, soft background
दूसरे नाम:Telugu Bangaru TheegaluKannada Sona Masoori AkkiTamil Sona Masoori ArisiHindi Sona Masoori Chawal

यह क्या है

सोना मसूरी चावल (Sona masoori rice) अनाज वाली घास Oryza sativa से मिलने वाला खुशबूदार, हल्का, मीडियम-ग्रेन सफेद चावल है। यह रोज़ खाए जाने वाला साउथ इंडियन टेबल राइस है, जिसे आप सांभर, रसम, कूटू या पप्पू के साथ परोसते हैं।

यह साबुत, मिल्ड या परबॉयल्ड कच्चे दानों के रूप में मिलता है। आंध्र और तेलंगाना में इसे बंगारु थीगलु कहते हैं, कर्नाटक में सोना मसूरी अक्की, तमिलनाडु में सोना मसूरी अरिसि, और हिंदी में सोना मसूरी चावल।

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स्वाद और खुशबू

खुशबूदारमीठा

पका हुआ सोना मसूरी साफ़, हल्की मिठास के साथ नाज़ुक अनाज जैसी खुशबू देता है। दाना सधा हुआ रहता है, बासमती जैसी तेज़ फूलों वाली महक नहीं आती। इससे आपकी करी और दाल का स्वाद उभरता है, चावल शो चुराने नहीं लगता।

खाने में इस्तेमाल

कब डालें

पकाते समय

धुले दाने सीधे उबलते पानी में डालें या कुकर में पकाएँ।

रोज़ के टेबल राइस की तरह इसे सांभर, रसम, कूटू या दाल पप्पू के साथ खाएँ। नींबू राइस (चित्रन्न), पुलिहोरा (इमली राइस) और दही राइस जैसे मिक्स्ड राइस में यह खूब खिलता है।

त्योहार या कम्फर्ट कुकिंग के लिए पीली मूंग दाल, काली मिर्च और जीरा के साथ वेन पोंगल बनाएँ, या गुड़ मिलाकर सक्करै पोंगल। साउथ इंडियन रसोई में भीगे हुए सोना मसूरी कच्चे चावल को परबॉयल्ड चावल और उड़द दाल के साथ मिलाकर खमीर उठा इडली व डोसा बैटर पीसा जाता है।

इसकी जगह क्या डालें

  • Ponni riceबराबर मात्रा में इस्तेमाल करें; हल्का, नॉन-स्टिकी टेक्सचर मिलता है।
  • Kolam riceनाज़ुक मीडियम-ग्रेन और फूली हुई बनावट के साथ मिलती-जुलती जगह लेता है।

कहाँ से आया और कहाँ उगता है

यह वैराइटी आंध्र प्रदेश के बापटला स्थित एग्रिकल्चरल रिसर्च स्टेशन में सोना और महसूरी कल्टीवार्स को क्रॉस करके विकसित की गई। आज भी आंध्र प्रदेश में बड़े पैमाने पर उगती है, और तेलंगाना व कर्नाटक में भी, खासकर तुंगभद्रा और कृष्णा सिंचाई पट्टियों के इर्द-गिर्द। तेलुगू में इसे प्यार से बंगारु थीगलु कहते हैं, अर्थ ‘सुनहरी लता’।

कहाँ उगता है

Andhra Pradesh Telangana Karnataka

खरीदना और रखना

अच्छी क्वालिटी कैसे पहचानें

कटाई के बाद 6 से 12 महीने तक एज़्ड हुई सोना मसूरी चुनें। यह पानी अच्छी तरह सोखती है और दाने अलग-अलग, गैर-चिपचिपे पकते हैं।

मिलावट की आसान जाँच

FSSAI DART के अनुसार, सादे पानी में मुट्ठीभर दाने घुमाएँ। शुद्ध चावल पानी साफ़ रखता है; अगर रंग घुलता दिखे तो दानों में पानी में घुलने वाले रंग मिलाए हो सकते हैं।

कैसे रखें

कच्ची सोना मसूरी को एयरटाइट डिब्बे में ठंडी, नमी-रहित पेंट्री में रखें ताकि घुन और फफूंदी दूर रहें।

कितने दिन चलता है: 12 से 24 महीने, जब ठीक से सुखाकर और स्टोर किया जाए

पोषण

लगभग 340-350 किलो-कैलोरी प्रति 100 ग्राम, ज़्यादातर आसानी से पचने वाले कार्ब्स, और करीब 6-7 ग्राम प्रोटीन।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सोना मसूरी की खुशबू बासमती से कैसे अलग है?

इसमें नाज़ुक, प्राकृतिक अनाज जैसी खुशबू और साफ़, हल्की मिठास होती है, बासमती जैसी तेज़ फूलों वाली या परफ्यूमी महक नहीं। इससे करी और दालें आगे रहती हैं।

सोना मसूरी चावल कैसे पकाएँ?

धुले दाने सीधे उबलते पानी में डालें या कुकर में पकाएँ। बस इतना ही।

क्या सोना मसूरी इडली और डोसा बैटर के लिए ठीक है?

हाँ। साउथ इंडियन रसोई में भीगा सोना मसूरी कच्चा चावल, परबॉयल्ड चावल और उड़द दाल मिलाकर खमीर उठा इडली-डोसा बैटर पीसा जाता है।

क्या सोना मसूरी परबॉयल्ड चावल के रूप में भी मिलता है?

हाँ। यह साबुत, मिल्ड या परबॉयल्ड कच्चे दानों के रूप में बिकता है।

सोना मसूरी का अच्छा विकल्प क्या है?

पोन्नी चावल बराबर मात्रा में लें, उसी तरह हल्का और नॉन-स्टिकी टेक्सचर देता है। कोलम चावल भी विकल्प है, नाज़ुक मीडियम-ग्रेन और फूली बनावट के साथ।