यह क्या है
केसर (Saffron) आईरिस परिवार के पौधे Crocus sativus L. के फूल का सूखा हिस्सा है: तीन भागों में बँटा वर्तिकाग्र और वर्तिका का ऊपरी सिरा। यह पौधा शरद ऋतु में खिलता है।
अधिकतर यह साबुत लाल रेशों के रूप में मिलता है; पिसा हुआ सूखा पाउडर भी बिकता है।
स्वाद और खुशबू
इसकी खुशबू मीठी, शहद जैसी होती है, जिसमें हल्की हरी घास जैसी ताज़गी, फूलों की नर्म महक और कस्तूरी जैसी मीठी गहराई रहती है। भिगोने पर सूखी घास जैसी गरम, सोंधी महक उभरती है और स्वाद हल्का कड़वा लगता है।
खाने में इस्तेमाल
कब डालें
मिठाइयों के लिए, रेशों को गरम दूध या चीनी की चाशनी में भिगोकर श्रीखंड, केसर पेड़ा, रसमलाई या केसरी बाथ में मिला दें।
चावल के लिए, केसर को गरम दूध या पानी में भिगोएँ और दम से पहले परत लगे चावल पर छिड़कें; अवधी और हैदराबादी बिरयानी में यही आम तरीका है।
पेय के लिए, रेशों को गरम दूध, ग्रीन टी या त्योहारों वाले मसालेदार पेयों में भिगोएँ। हरी इलायची और पतले कटे बादाम के साथ कश्मीरी कहवा में यह ज़रूरी होता है।
इसकी जगह क्या डालें
- Safflowerकुसुम (सैफ्लावर) सिर्फ़ रंग की नकल करता है और असली केसर का स्वाद नहीं देता।
- Turmericसिर्फ़ रंग के लिए एक छोटी चुटकी लें; स्वाद अलग रहेगा।
कहाँ से आया और कहाँ उगता है
केसर का मूल निवास भूमध्यसागरीय क्षेत्र और दक्षिण-पश्चिम एशिया है। भारत में इसकी खेती कश्मीर घाटी में सदियों से बड़े पैमाने पर होती रही है। जम्मू और कश्मीर प्रमुख उत्पादक क्षेत्र है, जो कारेवा उच्चभूमि के आसपास केंद्रित है; हिमाचल प्रदेश के कुछ ठंडे पहाड़ी हिस्सों में भी इसकी खेती होती है। लंबे, मोटे वर्तिकाग्र, गहरे लाल रंग और क्रोसिन की अधिक मात्रा के लिए कश्मीर केसर को आधिकारिक भौगोलिक संकेतक (जीआई टैग) मिला हुआ है।
कहाँ उगता है
मशहूर किस्में
- Kashmir SaffronGI टैग
Jammu and Kashmir
खरीदना और रखना
अच्छी क्वालिटी कैसे पहचानें
गहरे सुर्ख लाल रेशे देखें जिनके सिरे हल्के फैले हों, और नीचे की ओर पीली वर्तिका के हिस्से बहुत कम हों।
मिलावट की आसान जाँच
रेशों को गरम पानी में डालें: शुद्ध केसर धीरे-धीरे साफ़ सुनहरा पीला छोड़ता है और साबुत रहता है। रंगे हुए मिलावटी धागे तुरंत सुर्ख लाल छोड़ सकते हैं और बिखर जाते हैं।
कैसे रखें
केसर को हवाबंद काँच के डिब्बे में ठंडी, अँधेरी और सूखी अलमारी में, रोशनी और नमी से दूर रखें।
कितने दिन चलता है: हवाबंद डिब्बे में, नमी और तेज़ रोशनी से दूर रखने पर 2 से 3 साल तक चलता है।
पोषण
इसका रंग और खुशबू मुख्य रूप से कैरोटीनॉयड क्रोसिन और क्रोसेटिन से आते हैं; सैफ्रानल और पिक्रोक्रोसिन भी इसमें योगदान देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बिरयानी के लिए केसर कैसे इस्तेमाल करूँ?
रेशों को गरम दूध या पानी में भिगोएँ और आख़िरी दम से पहले परतदार चावल पर हल्का छिड़क दें। इससे खुशबू और सुनहरा रंग आता है।
मेरा केसर शुद्ध है या नहीं, कैसे जाँचूँ?
कुछ रेशे गरम पानी में डालें। शुद्ध केसर धीरे-धीरे साफ़ सुनहरा पीला छोड़ता है और साबुत रहता है; नकली तुरंत गहरा लाल छोड़ सकता है और टूट-बिखर जाता है।
भारत के किन पकवानों में केसर डाला जाता है?
कश्मीरी कहवा, अवधी और हैदराबादी बिरयानी, और मिठाइयाँ जैसे केसर पेड़ा, श्रीखंड, रसमलाई और केसरी बाथ।
केसर को कैसे रखूँ और यह कितने समय तक चलता है?
इसे हवाबंद काँच के जार में ठंडी, अँधेरी, सूखी अलमारी में रखें। ठीक से रखा गया केसर 2 से 3 साल तक अपनी खुशबू और रंग की ताक़त बनाए रखता है।
केसर की जगह क्या इस्तेमाल करूँ?
कुसुम (सैफ्लावर) की पंखुड़ियाँ नारंगी-लाल रंग की नकल कर सकती हैं पर खुशबू नहीं देतीं। ज़रूरत पड़े तो सिर्फ़ रंग के लिए हल्दी की एक छोटी चुटकी लें; स्वाद अलग रहेगा।








